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मिटेगी कैसे यजीदो तुम्हारी साज़िश से
हुसैन का है सहारा सदाए मातम को 

 

अली हैं नासीरो ग़म खार हम गरीबों के
पसंद करती हैं ज़हरा सदाए मातम को 

 

हुसैन का है सहारा सदाए मातम को
मिसाले कशती उभारा सदाए मातम को


बिछाके फ़र्श अज़ा का अली की बैटी न
कि ताबा हश्र संवारा सदाए मातम को


ज़माना कहता है लब्बैक या  हुसैन सुनो 
हर एक गोश गुज़ारा सदाए मातम को


अली के नाम पे जीते हैं और मरते हैं 
कभी न होगा ख़सारा सदाए मातम को


लहू के सोज़ में नामे हुसैन है शामिल
दिलो जिगर में उतारा सदाए मातम को

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